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रामानुजगंज: कनहर नदी के तट पर बिखरी ‘छोटा काशी’ की छटा, बनारस की तर्ज पर भव्य महाआरती में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

रामानुजगंज / बलरामपुर: सनातन संस्कृति में पावन नदी और जल स्रोतों के पूजन के महापर्व ‘गंगा दशहरा’ के पावन अवसर पर सरहद पर बसी रामानुजगंज की ऐतिहासिक कनहर नदी का तट आध्यात्मिक और दिव्य चेतना का केंद्र बन गया। छत्तीसगढ़-झारखंड की सीमा रेखा तय करने वाली कनहर नदी के पाटोली घाट पर इस वर्ष उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) की तर्ज पर एक बेहद भव्य, अलौकिक और ऐतिहासिक ‘गंगा महाआरती’ का आयोजन किया गया। इस महाआयोजन के साक्षी बनने के लिए समूचे बलरामपुर जिले और सीमावर्ती क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र ‘हर-हर गंगे’ और ‘कनहर मैया की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

वाराणसी के विद्वान आचार्यों ने कराया पूजन, शंखनाद से गूंजा तट

इस विशेष पर्व पर कनहर नदी के सुंदर घाटों को दीपों की कतारों और आकर्षक विद्युत सज्जा से इस तरह सजाया गया था कि मानो साक्षात काशी नगरी कनहर की गोद में उतर आई हो। आयोजन को पूरी तरह पारंपरिक और शास्त्रीय रूप देने के लिए विशेष रूप से देश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस से विद्वान पंडितों और आचार्यों की टोली को आमंत्रित किया गया था। बनारस से आए इन भूदेवों ने पूर्ण वैदिक रीति-नीति और मंत्रोच्चार के साथ नदी की पूजा-अर्चना संपन्न कराई। जैसे ही आचार्यों ने पीतल के विशाल दीपदान उठाकर महाआरती की शुरुआत की, वैसे ही शंख ध्वनि, डमरुओं की थाप और वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ से पूरा वातावरण दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो गया।

नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल के नेतृत्व में भव्य आयोजन, पूर्व जिपं अध्यक्ष पुष्पा नेताम रहीं उपस्थित

सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने वाला यह भव्य आयोजन नगर पालिका परिषद रामानुजगंज के अध्यक्ष रमन अग्रवाल के विशेष नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा नेताम और नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने खुद अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मां गंगा स्वरूप कनहर नदी की उतारी और क्षेत्र की सुख, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। जनप्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे रामानुजगंज के इतिहास में एक नया धार्मिक अध्याय बताया।

श्रद्धालुओं का लगा तांता, प्रशासन रहा मुस्तैद

कनहर के घाटों पर जैसे ही हजारों दीपों की लौ एक साथ टिमटिमाई, वहां मौजूद हर आंख इस अनुपम दृश्य को देखकर निहाल हो उठी। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और महिलाओं की भारी भागीदारी देखने को मिली, जिन्होंने नदी में दीपदान कर पुण्य लाभ कमाया। भीड़ की संवेदनशीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। घाट के किनारे बैरिकेडिंग से लेकर पुलिस बल की तैनाती तक, सभी व्यवस्थाएं इतनी पुख्ता थीं कि सैकड़ों की भीड़ के बावजूद पूरा धार्मिक अनुष्ठान बेहद शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।

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