बूथों पर होगी ‘कांग्रेस की धमक’: प्रदेश भर के दिग्गज अब संभालेंगे जमीनी मोर्चा, BLA नियुक्ति में बड़े बदलाव के संकेत!
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘मिशन 2026’ के तहत कांग्रेस ने एक मास्टरस्ट्रोक चला है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में अपनी संगठनात्मक जड़ों को अभेद्य बनाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक ‘बूथ एक्शन प्लान’ लागू कर दिया है। पार्टी के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

27,196 बूथों पर ‘अजेय’ किला बनाने की तैयारी पार्टी ने राज्य के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 27,196 मतदान केंद्रों को अपना मुख्य केंद्र बिंदु बनाया है। कांग्रेस का लक्ष्य केवल बूथ जीतना नहीं, बल्कि हर बूथ पर एक ऐसा ‘संगठनात्मक कवच’ तैयार करना है, जिसे भेदना विरोधियों के लिए नामुमकिन हो। इस अभियान के तहत निष्क्रिय पड़े बूथ लेवल एजेंटों (BLA-2) की तत्काल छंटनी कर वहां ‘वॉर-रेडी’ कार्यकर्ताओं को तैनात करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
विधायक से लेकर पदाधिकारी तक—सबकी ‘जवाबदेही’ तय इस बार की रणनीति में सबसे बड़ा बदलाव नेतृत्व की सक्रियता को लेकर है। प्रदेश कांग्रेस ने ‘हाइ-कमान से बूथ-कमान’ तक की नीति अपनाते हुए अपने दिग्गज नेताओं को भी मैदान में उतार दिया है। अब राज्य के विधायक, पूर्व विधायक, प्रदेश के पदाधिकारी और जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने निवासरत बूथ पर खुद BLA के रूप में काम करें। यह सीधा संदेश है—संगठन का शीर्ष नेतृत्व अब सीधे जमीनी स्तर की राजनीति का हिस्सा होगा।

सामाजिक संतुलन और सख्त डेडलाइन प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैटू ने इस प्रक्रिया में सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखने को कहा है। उन्होंने सभी जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियुक्ति प्रक्रिया में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी नियुक्तियों का विवरण नाम, पते और मोबाइल नंबर के साथ निर्धारित प्रारूप में प्रदेश कार्यालय को अनिवार्य रूप से सौंपना है।
क्या है संकेत? कांग्रेस की यह कवायद यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी अब चुनाव से पहले किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। ‘बूथ जीता, तो चुनाव जीता’ के मंत्र पर चलते हुए कांग्रेस अब छत्तीसगढ़ की हर पंचायत और वार्ड को अपनी विचारधारा के रंग में रंगने की तैयारी कर चुकी है।
