कुसमी के झालबासा गांव में जल जीवन मिशन का काम ठप, आदिवासी बृजिया समाज दूषित पानी पीने को मजबूर
बलरामपुर: जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत साबाग का ‘झालबासा’ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब 200-250 की आबादी वाला यह गांव, जहां मुख्य रूप से बृजिया आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं, विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। गांव में पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण गांव में पेयजल का कोई ठोस साधन उपलब्ध नहीं है। एक भी हैंडपंप न होने के कारण ग्रामीण नदी-नालों पर निर्भर हैं। ग्रामीण बताते हैं कि नदी में ‘चुआं’ (गड्ढा) बनाकर वे पानी निकालते हैं और कपड़े से छानकर पीने व खाना बनाने में उपयोग करते हैं। बरसात के दिनों में यह पानी और अधिक दूषित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है।

जल जीवन मिशन की अधूरी उम्मीदें ग्रामीणों ने बताया कि दो साल पहले गांव में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कार्य शुरू किया गया था। बृजिया समाज को उम्मीद थी कि अब उन्हें स्वच्छ पेयजल मिलेगा, लेकिन ठेकेदार या विभाग की लापरवाही के कारण निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया। आज भी ग्रामीण उस पाइपलाइन के अधूरे पड़े होने का दंश झेल रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव गांव में शिक्षा का ढांचा भी पूरी तरह चरमराया हुआ है। छोटे-छोटे बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर अन्य गांवों तक जाना पड़ता है। इसके अलावा, गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। यहाँ तक कि ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने जैसी सामान्य सरकारी सेवाओं के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।

अधिकारियों की अनदेखी पर आक्रोश ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अधिकारी निरीक्षण के लिए आते तो हैं, लेकिन उसके बाद गांव की सुध लेने कोई नहीं आता।
प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग झालबासा गांव के निवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से गांव में स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उपेक्षित बृजिया समाज ने अब प्रशासन से उम्मीद लगाई है कि उनके गांव तक भी विकास की किरण पहुंचेगी और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलेगा।
