बलरामपुर हंसपुर प्रकरण: रिमांड पर लाए गए पूर्व एसडीएम के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाली स्थिति
बलरामपुर जिले के बहुचर्चित हंसपुर प्रकरण में जांच के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी, निलंबित पूर्व एसडीएम करूण डहरिया को रिमांड पर लेकर घटनास्थल पहुंची। आरोपी की मौजूदगी की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए और उन्होंने पुलिस वाहन को घेरते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए “हत्यारे को फांसी दो” जैसे नारे लगाए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए लोगों को समझाने का प्रयास किया। लगभग एक घंटे तक चले इस विरोध के बाद स्थिति सामान्य हुई और पुलिस टीम जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में सफल रही।
रिमांड पर पूछताछ और साक्ष्य संकलन
पुलिस ने इस मामले में पूछताछ और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों के सत्यापन के लिए 30 मार्च को आरोपी करूण डहरिया को तीन दिन की रिमांड पर लिया था। कुसमी एसडीओपी आशीष कुंजाम और थाना प्रभारी विमलेश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम आरोपी को हंसपुर गांव लेकर पहुंची, जहां घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (reconstruction) और तथ्यों की पुष्टि की गई।
रिमांड अवधि पूरी होने के पश्चात 1 अप्रैल को आरोपी को पुनः अंबिकापुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया।
प्रकरण की पृष्ठभूमि
यह मामला 14 फरवरी की रात का है, जब हंसपुर गांव में बॉक्साइट के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। ग्रामीणों ने खनिज से लदे एक ट्रक को रोक लिया था, जिसके बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ।
आरोप है कि मौके पर पहुंचे तत्कालीन एसडीएम और उनके साथियों के साथ विवाद बढ़ गया, जिसमें तीन ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई। बाद में उन्हें वाहन में ले जाया जा रहा था, उसी दौरान 60 वर्षीय राम नरेश राम की मृत्यु हो गई, जबकि दो अन्य ग्रामीण घायल हो गए।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से संबंधित एसडीएम को निलंबित कर दिया था। कोरंधा थाना में आरोपी सहित चार व्यक्तियों के विरुद्ध हत्या सहित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच संवेदनशीलता और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। चार्जशीट दाखिल करने से पूर्व सभी आवश्यक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी न रह जाए।
