सांपों के डर से मुक्त होगा बलरामपुर: अब ‘एंटी-स्नेक शू’ बचाएगा ग्रामीणों की जान, जानें कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक
बलरामपुर / राजधनवार: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में खेती और जंगलों में काम करने वाले ग्रामीणों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। सर्पदंश (स्नेक बाइट) से होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखा ‘एंटी-स्नेक शू’ तैयार किया है। यह विशेष जूता न केवल किसानों की सुरक्षा करेगा, बल्कि सांपों को पास आने से पहले ही दूर भगा देगा।
गणितज्ञ प्रो. डॉ. बिमल कुमार मिश्रा का कमाल

झारखंड के आदर्श कॉलेज (राजधनवार) के प्राचार्य और प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो. डॉ. बिमल कुमार मिश्रा द्वारा विकसित इस तकनीक को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है। डॉ. मिश्रा का यह नवाचार उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा जहाँ सर्पदंश एक बड़ी समस्या है।
कंपन से भागेंगे सांप: तकनीक कैसे करती है काम?
सांपों की सुनने की क्षमता कम होती है, लेकिन वे जमीन में होने वाले कंपन के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
- स्मार्ट सेंसर: इस जूते में एक विशेष मॉड्यूल लगा है जो चलते समय जमीन में 20 से 80 हर्ट्ज़ की निम्न आवृत्ति (Frequency) का कंपन पैदा करता है।
- खतरे का संकेत: यह कंपन सांपों को खतरे का अहसास कराता है, जिससे वे जूते के संपर्क में आने से पहले ही अपना रास्ता बदल लेते हैं।
- अहिंसक समाधान: इस तकनीक का उद्देश्य सांप को मारना नहीं, बल्कि इंसान और जीव के बीच एक सुरक्षित दूरी बनाए रखना है।
खेत और दलदल में भी बेअसर नहीं होगा सुरक्षा कवच

किसानों की जरूरतों को देखते हुए इसे बेहद खास तरीके से डिजाइन किया गया है:
- बैटरी बैकअप: इसमें लगी लिथियम-आयन बैटरी एक बार चार्ज होने पर 240 से 360 घंटे तक लगातार काम कर सकती है।
- मजबूत बनावट: यह जूता पूरी तरह से वाटरप्रूफ और मडप्रूफ है, जिससे धान के लबालब खेतों और बारिश के कीचड़ में भी यह खराब नहीं होगा।
- इंसानों के लिए सुरक्षित: जूते से निकलने वाला कंपन इंसानों को महसूस नहीं होता और पूरी तरह सुरक्षित है।
अगले साल तक बाजार में आने की उम्मीद
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार इस तकनीक के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया जल्द शुरू कर सकती है। बाजार में इसकी अनुमानित कीमत ₹2,000 के आसपास रखी गई है, ताकि मध्यम वर्गीय किसान और ग्रामीण इसे सुगमता से खरीद सकें।
बलरामपुर के लिए क्यों है जरूरी?
बलरामपुर जिला अपनी भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों के कारण सर्पदंश के प्रति बेहद संवेदनशील माना जाता है। मानसून के दौरान खेतों में काम करते समय हर साल कई लोग अपनी जान गंवाते हैं। इस आधुनिक तकनीक के आने से न केवल लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि मौतों के आंकड़ों में भी भारी कमी आने की संभावना है।
