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उज्जैन: कड़ोदिया ग्राम की अनूठी प्रभात फेरी—आस्था, स्वास्थ्य और समरसता का संगम, आज ज्ञान केंद्र स्थापना की पहल

उज्जैन जिले के कड़ोदिया ग्राम में एक ऐसी परंपरा जीवंत रूप में दिखाई देती है, जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और स्वास्थ्य चेतना का भी सशक्त संदेश देती है। यहां ग्रामीण प्रतिदिन सूर्योदय से पहले जागकर पूरे गांव में प्रभात फेरी निकालते हैं। राम भजन और कीर्तन करते हुए यह फेरी गांव के विभिन्न मंदिरों से गुजरती है और अंत में राम-जानकी मंदिर पर जाकर पूर्ण होती है।

इस प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में ग्रामवासी शामिल होते हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। सामूहिक भजन-कीर्तन के साथ चलना न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि नियमित दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता के कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। गांव में यह परंपरा सामाजिक समरसता और एकजुटता का सशक्त उदाहरण बन चुकी है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस राम-जानकी मंदिर को देखकर उन्हें “टेंट में विराजमान राम” की याद आती थी। इसी भाव ने मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प जगाया और वहीं से इस प्रभात फेरी की शुरुआत हुई। विशेष बात यह है कि यह परंपरा 9 नवंबर 2019 से निरंतर जारी है, जब अयोध्या राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय आया था।

इसी कड़ी में 6 अप्रैल 2026 को ज्ञान यज्ञ परिवार की स्वराज यात्रा, जो रामानुजगंज से प्रारंभ हुई थी, रात्रि में कड़ोदिया ग्राम पहुँची। संस्थान से जुड़े पुराने साथी कमल सिंह चौहान जी के निवास पर यात्रा के साथियों ने रात्रि विश्राम किया।

आज कड़ोदिया ग्राम में ज्ञान केंद्र की स्थापना की भी योजना है, जिससे इस ग्राम में पहले से मौजूद सामाजिक समरसता और वैचारिक संवाद की परंपरा को एक संगठित दिशा मिल सके। यह पहल गांव की सक्रिय और जागरूक परंपरा के साथ मिलकर एक नया आयाम स्थापित करने की ओर अग्रसर है।

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