पुलिस व्यवस्था पर अधिक कार्यभार उसकी अक्षमता का प्रमुख कारण: बजरंग मुनि
रामानुजगंज रायपुर छ. ग.। पुलिस व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर विचार व्यक्त करते हुए आचार्य बजरंग मुनि ने कहा कि पुलिस हमारी सुरक्षा की मुख्य आधारशिला है, लेकिन उसकी कार्यक्षमता पर बढ़ता दबाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायपालिका कुछ समय के लिए भी बंद हो जाए तो उतनी अराजकता नहीं फैलेगी, जितनी कि पुलिस व्यवस्था के ठप हो जाने पर उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस पर अत्यधिक कार्यभार और राजनीतिक हस्तक्षेप उसकी कार्यकुशलता को प्रभावित कर रहे हैं। पुलिस की स्वतंत्रता में कमी और लगातार बढ़ते दायित्वों के कारण व्यवस्था में अव्यवस्था फैल रही है। उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए पुलिस तंत्र को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की आवश्यकता बताई।
आचार्य मुनि ने आगे कहा कि अपराध और न्यायालय आज समाज में चर्चा के मुख्य विषय बन गए हैं। उन्होंने अपराध की परिभाषा और उसके लक्षणों को समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी इस विषय पर गंभीर चिंतन होना चाहिए।
उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में उनकी निष्क्रियता समाज को भटकाव की ओर ले जा रही है। समाज में सकारात्मक दिशा लाने के लिए व्यापक सामाजिक संवाद और संवैधानिक सुधार आवश्यक हैं।
इस चर्चा में कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में समाज में न्याय, सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर गहन मंथन किया गया।
