विकास या विनाश? ग्राम पंचायत नगरा में हादसे को न्योता देती सरकारी लापरवाही
नगरा (महुरांव): कहते हैं सरकारें योजनाएं इसलिए लाती हैं ताकि जनता का जीवन आसान हो सके, लेकिन जब वही योजनाएं भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही की भेंट चढ़ जाएं, तो वो सहूलियत नहीं बल्कि सीधे-सीधे मौत का जाल बन जाती हैं। कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर इन दिनों ग्राम पंचायत नगरा के महुरांव में देखने को मिल रहा है।

यहाँ ‘नल-जल योजना’ के तहत लोगों के घरों तक पानी पहुँचाने का वादा किया गया था। उम्मीद थी कि प्यास बुझेगी, लेकिन मिला तो सिर्फ एक डरावना अधूरा ढांचा, जो अब किसी बड़े हादसे के इंतजार में खड़ा है।
एक साल का लंबा इंतजार, पर हाथ लगी सिर्फ ‘हवा’
महुरांव में करीब एक साल पहले नल-जल योजना के तहत पानी टंकी और स्टामपोज (स्टैम्प पोस्ट) के निर्माण का काम बेहद जोर-शोर से शुरू हुआ था। ग्रामीणों को लगा कि चलिए, पानी की किल्लत दूर होगी। मगर अफ़सोस, साल बीत गया लेकिन न तो टंकी का काम पूरा हुआ और न ही जनता के हलक तक पानी की एक बूंद पहुँची। कागजों पर दौड़ने वाला विकास ज़मीन पर आते-आते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
बांस के खंभे और जर्जर प्लाई: सिर पर मंडराता काल
इस अधूरे निर्माण ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। ठेकेदार और संबंधित विभाग ने टंकी को आधा-अधूरा छोड़ दिया और सुरक्षा के नाम पर वहाँ सिर्फ सेंट्रिंग के बांस-बल्ले और कच्ची प्लाई लगाकर काम समेट लिया।
अब आलम यह है कि:
- जब भी इलाके में तेज हवा चलती है, तो ऊपर से भारी-भरकम बांस के खूंटे और प्लाईवुड के टुकड़े सीधे नीचे गिरते हैं।
- टंकी के आसपास रहने वाले लोग और वहाँ से गुजरने वाले राहगीर हर वक्त खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
- बच्चों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है, क्योंकि कब ऊपर से मौत का कोई टुकड़ा गिर जाए, कहा नहीं जा सकता।
सुलगता सवाल: आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?
यह सिर्फ एक अधूरी पानी की टंकी नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र की वो लापरवाही है जो किसी दिन बड़ी जनहानि की वजह बन सकती है। स्थानीय लोगों में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का साफ कहना है: “हम पानी के बिना तो जैसे-तैसे रह भी लें, लेकिन इस डर के साए में कब तक जिएं? अगर कोई बड़ा हादसा हुआ, कोई हताहत हुआ, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ठेकेदार, इंजीनियर या वो विभाग जो आंखें मूंदे बैठा है?”
वक्त रहते अगर प्रशासन नहीं जागा और इस अधूरे निर्माण को ठीक कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो महुरांव की यह टंकी किसी दिन बड़ी सुर्खी बन सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अफसर इस खौफ को खत्म करते हैं या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
– रिपोर्ट: प्रदीप ठाकुर
