पहली ही बारिश भी नहीं झेल सका 20 लाख की लागत का चेकडैम: पानी में बह गई गुणवत्ता, ग्रामीणों ने की तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग
बलरामपुर। जिले के शंकरगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलफिली में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। भीषण गर्मी में भूजल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण के नाम पर करीब 20 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत कराया गया चेकडैम निर्माण के महज छह माह के भीतर ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गुणवत्ताहीन निर्माण की भेंट चढ़ा यह चेकडैम वर्तमान में टूटकर लगभग छह अलग-अलग हिस्सों में बिखर चुका है। इस स्थिति से आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों व निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

जल संरक्षण के नाम पर लाखों का खेल, पहली बरसात में बहा बांध
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में जल संकट से निजात दिलाने और पशुओं व खेती-किसानी के लिए पानी का ठहराव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस चेकडैम का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण के दौरान सीमेंट, गिट्टी और तकनीकी मापदंडों की घोर अनदेखी की गई। ठेकेदार और जिम्मेदार तकनीकी अमले की मिलीभगत के चलते लीपापोती कर लाखों रुपये का भुगतान तो निकाल लिया गया, लेकिन छह महीने बीतते-बीतते चेकडैम का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया।
वर्तमान में चेकडैम का एक बड़ा हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह चुका है और पूरा ढांचा जगह-जगह से दरक कर आधा दर्जन टुकड़ों में तब्दील हो चुका है। इससे न तो जल संचयन हो पा रहा है और न ही ग्रामीणों को इसका कोई लाभ मिल रहा है।
सीईओ ने दिए जांच के आदेश, जांच रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस संबंध में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने संज्ञान लेते हुए बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तकनीकी टीम गठित कर दी गई है। इसके साथ ही शंकरगढ़ जनपद पंचायत सीईओ को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत निर्माण गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
