सरकारी निर्माणों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, रसूखदारों के संरक्षण में अनियमितताओं पर पर्दा डालने का आरोप
बलरामपुर। जिले में मानसून की पहली ही बारिश ने शासकीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का आलम यह है कि कुछ दिन पहले करोड़ों की लागत से बन रही नहर के क्षतिग्रस्त होने के बाद, अब पंचायत स्तर पर बनी नाली भी पहली बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी और ठेकेदारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

15वें वित्त की राशि से बनी नाली चंद घंटों में जमींदोज
ताजा मामला विकासखंड के ग्राम पंचायत भवरमाल का है। यहाँ 15वें वित्त आयोग के फंड से गोपाल प्रजापति के खेत से लेकर श्रवण के खेत तक करीब 5 लाख रुपये की लागत से नाली निर्माण कराया गया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत स्वीकृत इस कार्य को पूरा हुए अभी कुछ ही समय हुआ था, लेकिन पहली ही तेज बारिश ने इसकी मजबूती की पोल खोल दी। नाली कई जगहों से पूरी तरह टूटकर बिखर चुकी है, जिससे सरकारी बजट के दुरुपयोग की साफ तस्वीर सामने आ रही है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, मानकों की अनदेखी का आरोप
इस घटिया निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण अभिषेक गुप्ता, नरेन्द्र सिंह, सुनेश्वर, रमेश, राजेश, संदीप, गुलाब, अजय, अम्बिका, अनिल और अकास ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और बेहद घटिया निर्माण सामग्री (मटेरियल) का इस्तेमाल हुआ।
ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा:
“वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार शिकायत के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते ही इस खुली अनियमितता पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है, जिससे जिम्मेदार लोगों के हौसले बुलंद हैं।”
कुछ दिन पहले करोड़ों की नहर भी हुई थी क्षतिग्रस्त
गौरतलब है कि बलरामपुर जिले में घटिया निर्माण का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ दिनों पहले ही जल संसाधन विभाग की एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। घाघरा नदी से निकाली जा रही 5.50 किलोमीटर लंबी और लगभग 5.50 करोड़ रुपये लागत वाली सिंचाई नहर भी पहली ही तेज बारिश में कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस नहर से क्षेत्र के किसानों की 200 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी थी, लेकिन निर्माण पूरा होने से पहले ही इसमें आई दरारों ने तकनीकी मॉनिटरिंग और विभागीय संलिप्तता को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
प्रशासनिक जांच और रिकवरी की मांग
एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों से क्षेत्रवासियों का सरकारी तंत्र पर से भरोसा उठने लगा है। स्थानीय जनता और किसानों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि:
- नाली और नहर, दोनों ही मामलों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष तकनीकी जांच (Technical Audit) कराई जाए।
- निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की लैब टेस्टिंग हो।
- अनियमितता पाए जाने पर दोषी अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर (FIR) और रिकवरी की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर गाज गिरेगी या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा।
