RTI को लेकर रामानुजगंज में मचा हड़कंप: जिला शिक्षा अधिकारी के फरमान से प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
रामानुजगंज | ज्ञानतत्व प्रतिनिधि (प्रमोद मिश्रा) सूचना का अधिकार (RTI) कानून को लेकर एक चौंकाने वाला मामला रामानुजगंज से सामने आया है, जहां जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के कथित निर्देशों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (मुख्यालय) की आवक-जावक शाखा को बंद करने के निर्देश दिए हैं, जिससे आम नागरिकों और आवेदकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का मुख्यालय वर्ष 1976 से लगातार रामानुजगंज में संचालित होता आ रहा है। यह व्यवस्था तब से कायम है, जब बलरामपुर-रामानुजगंज जिला का गठन भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके, हाल के दिनों में प्रशासनिक गतिविधियों को धीरे-धीरे बलरामपुर स्थानांतरित किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। अब ताजा घटनाक्रम में आवक-जावक शाखा को भी प्रभावी रूप से बंद कर दिए जाने की बात सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, शाखा प्रभारी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी आवेदक से आवेदन स्वीकार न करें और न ही किसी प्रकार की पावती जारी करें। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति आवेदन देने कार्यालय पहुंचता है, तो उसे सीधे बलरामपुर भेजने को कहा गया है। निर्देशों में यह भी शामिल है कि डाक विभाग के माध्यम से आने वाली रजिस्ट्री या अन्य पत्राचार को भी स्वीकार न किया जाए और उन्हें भी बलरामपुर स्थानांतरित कर दिया जाए।
इस पूरे मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब स्थानीय मीडिया प्रतिनिधि द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से इस संबंध में बातचीत की गई। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उन्होंने शाखा प्रभारी को ऐसे निर्देश दिए हैं। उनका कहना था कि अब सभी प्रकार के आवेदन और पत्राचार बलरामपुर से ही संचालित किए जाएंगे।
इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित वे आम नागरिक हैं, जो सूचना का अधिकार (RTI) या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए कार्यालय का रुख करते हैं। आवेदकों को अब अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय कर बलरामपुर जाना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था और भी अधिक कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ है, बल्कि सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून की भावना के भी विपरीत है। RTI का उद्देश्य ही यह है कि आम नागरिक आसानी से सरकारी जानकारी तक पहुंच बना सकें, लेकिन इस तरह के निर्देश उस उद्देश्य को कमजोर करते हैं।
इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस स्थिति को नहीं सुधारा गया, तो यह एक गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है, जहां अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार कार्यालय संचालन को बदलते रहेंगे।
वर्तमान स्थिति यह है कि रामानुजगंज में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय केवल नाम मात्र का रह गया है। यहां अब केवल मुख्यालय का साइन बोर्ड दिखाई देता है, जबकि वास्तविक कार्य संचालन बलरामपुर से किया जा रहा है।
जनता और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए और पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। साथ ही, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या आम जनता को राहत मिल पाती है या नहीं।

