उबका बांध में पानी का रिसाव शुरू: नीलकंठपुर में बांध टूटने का खौफ, 100 एकड़ फसल और 15 घरों पर मंडराया संकट; प्रशासनिक अमला मुस्तैद
रामचन्द्रपुर / बलरामपुर : लगातार हो रही झमाझम बारिश के बीच रामचन्द्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत नीलकंठपुर स्थित उबका बांध की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। बांध के निचले हिस्से (बेस) से पानी का तेज रिसाव (सीपेज) शुरू होने के बाद ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। बारिश का दौर जारी रहने से बांध के टूटने की आशंका बढ़ गई है, जिससे करीब 100 एकड़ में लहलहाती फसल और नदी किनारे बसे 10 से 15 परिवारों के आशियानों पर तबाही का खतरा मंडरा रहा है।

2008 में बना था बांध, 2017 की त्रासदी याद कर सहमे ग्रामीण
वर्ष 2008 में निर्मित यह बांध नीलकंठपुर और आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का मुख्य जरिया है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2017 में भी बांध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। उस दौरान प्रशासनिक मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर वर्ष 2018 में खुद ही मरम्मत कराई थी। इस बार रिसाव पुराने क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ ही दूरी पर हो रहा है।
लुत्ती बांध हादसे का खौफ: अनदेखी पड़ी भारी तो होगी भारी जनहानि
ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी जायज है क्योंकि पिछले वर्ष (सितंबर 2023) बलरामपुर के लुत्ती गांव में 40 साल पुराना बांध टूटने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई इंसानों और मवेशियों की जान चली गई थी। स्थानीय निवासी सुरेंद्र यादव का कहना है कि रिसाव भले ही अभी छोटा दिख रहा हो, लेकिन बारिश के दबाव में यह कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकता है।
निधि का अभाव, ग्रामीणों ने खुद जेसीबी लगाकर किया मरम्मत का प्रयास
रामचन्द्रपुर कांग्रेस मंडल अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास ने बताया कि बांध किसानों की आजीविका की रीढ़ है। जब पंचायत से मरम्मत की गुहार लगाई गई, तो फंड न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद जेसीबी लगाकर अस्थाई मरम्मत की कोशिश की, जिसमें सरपंच की ओर से मात्र 2,000 रुपये का सहयोग दिए जाने की बात कही जा रही है।
प्रशासनिक अमला मौके पर, तकनीकी जांच की मांग
कलेक्टर और जिला प्रशासन को शिकायत भेजे जाने के बाद एसडीएम, तहसीलदार और वन विभाग का प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का मुआयना किया। ग्रामीणों ने शासन से बिना वक्त गंवाए विशेषज्ञ इंजीनियरों से तकनीकी जांच कराने और स्थायी पिचिंग-मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि पिछले लुत्ती हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन इस रिसाव को रोकने के लिए कितनी तेजी से ठोस कदम उठाता है।
