रामानुजगंज में मिली ऐतिहासिक धरोहर : 96 साल पुरानी पांडुलिपि में दर्ज हैं उस दौर की अनकही कहानियां
रामानुजगंज। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में संचालित ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है। रामानुजगंज नगर के मध्य बाजार निवासी रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के यहां 96 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि मिली है, जिसमें तत्कालीन समय की कई ऐतिहासिक और सामाजिक घटनाओं का उल्लेख दर्ज है।

📝 मुख्य बिंदु और प्रशासनिक निरीक्षण
छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में पुराने दस्तावेजों और पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण का अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिले में भी प्राचीन पांडुलिपियों की खोज की जा रही है।
- विभिन्न क्षेत्रों से लोग स्वयं आगे आकर अपने पास सुरक्षित पुराने दस्तावेजों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं।
- इन दस्तावेजों का प्रशिक्षित सर्वेयरों द्वारा दस्तावेजीकरण कर ऑनलाइन अपलोड किया जा रहा है।
- देवनागरी हिंदी में लिखी गई इस पांडुलिपि में वर्ष 1930 से 1944 के बीच की कई घटनाओं का उल्लेख है।
अधिकारियों का दौरा: इस दुर्लभ पांडुलिपि को देखने के लिए बलरामपुर जिले के नोडल अधिकारी रामपथ यादव, सहायक नोडल संजय कुमार गुप्ता और जिला ग्रंथपाल राजकुमार शर्मा स्वयं गुप्ता परिवार के निवास पहुंचे।

🔍 पांडुलिपि में दर्ज महत्वपूर्ण जानकारियां
पांडुलिपि के संरक्षक रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि यह दस्तावेज उनके दादा लक्ष्मी प्रसाद रौनियार द्वारा लिखा गया था। इस ऐतिहासिक दस्तावेज में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विवरण दर्ज हैं:
- साहित्यिक एवं धार्मिक विषय: इसमें शारदा माता की भक्ति, भैरवी, गजल, दोहा, चौगोला, दादरा, ईश्वर प्रार्थना और द्रोपदी विनय जैसे विषयों का उल्लेख है।
- ऐतिहासिक प्राकृतिक आपदा: रामानुजगंज की कन्हर नदी में वर्ष 1944 में आई बाढ़ का विस्तृत वर्णन भी इसमें दर्ज किया गया है।
- तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था: पांडुलिपि में उल्लेख है कि उस समय पाल तहसील कार्यालय धमनी में संचालित होता था।
- पारिवारिक इतिहास: इसके अलावा इसमें परिवार के लगभग 15 पीढ़ियों के वंशवृक्ष को भी चित्रित किया गया है, जो इस दस्तावेज को और अधिक ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।
💾 संरक्षण एवं डिजिटल रिकॉर्ड की प्रक्रिया
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पांडुलिपि को जिले की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ज्ञानभारतम अभियान के माध्यम से जिले में ऐसी कई और दुर्लभ पांडुलिपियों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
