पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ को कानूनी नोटिस: पीरियड्स और पूजा वाले बयान पर बढ़ा विवाद, बिना शर्त माफी की मांग
नई दिल्ली / मुंबई भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ अपने एक हालिया बयान को लेकर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। मुंबई के एक वरिष्ठ वकील ने पूर्व सीजेआई को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मासिक धर्म (पीरियड्स) और धार्मिक पूजा को लेकर दिया गया उनका बयान सनातन धर्म की स्थापित परंपराओं और मान्यताओं को ठेस पहुँचाता है।

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ‘मासिक धर्म स्वच्छता सप्ताह’ (Menstrual Hygiene Week) के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने पारिवारिक जीवन का एक संस्मरण साझा किया।
उन्होंने बताया था:
“जब मेरे बेटे की शादी हुई, तो हमारे घर में पहला गणपति उत्सव था। उस दौरान मेरी बहू को मासिक धर्म आ गए। आम परंपराओं के अनुसार ऐसे समय में महिलाओं को पूजा से दूर रहने को कहा जाता है, लेकिन मैंने अपनी बहू से कहा कि वह पूजा में शामिल हो और भगवान गणेश की आरती करे।”
इस बयान के पीछे पूर्व सीजेआई का उद्देश्य समाज में पीरियड्स को लेकर फैली रूढ़िवादिता को तोड़ना और लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देना था।
कानूनी नोटिस में लगे गंभीर आरोप
मुंबई के एडवोकेट घनश्याम उपाध्याय द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में पूर्व मुख्य न्यायाधीश के बयान पर तीखी आपत्ति जताई गई है। नोटिस में मुख्य रूप से तीन बिंदु उठाए गए हैं:
- धार्मिक मान्यताओं का अपमान: नोटिस के अनुसार, पूर्व सीजेआई का यह बयान सनातन धर्म के शुद्धता के सिद्धांतों और प्राचीन धार्मिक नियमों का मज़ाक उड़ाता है।
- व्यक्तिगत आचरण को सामाजिक नियम बनाना: वकील का तर्क है कि पूर्व सीजेआई का यह कदम उनका व्यक्तिगत पारिवारिक निर्णय हो सकता है, लेकिन इसे सार्वजनिक मंच से इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए जिससे समाज में भ्रम फैले।
- सबरीमाला मामले से जुड़ाव का अंदेशा: नोटिस में मांग की गई है कि पूर्व सीजेआई यह स्पष्ट करें कि क्या इस बयान के ज़रिए वे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर मामले (जिसमें उन्होंने मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था) में अपनी व्यक्तिगत विचारधारा को देश पर थोपने का प्रयास कर रहे हैं?
नोटिस में की गई मुख्य मांगें
नोटिस के ज़रिए एडवोकेट उपाध्याय ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- वे अपने इस बयान के लिए देश और सनातन समाज से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें।
- इस विषय पर एक सार्वजनिक स्पष्टीकरण (Clarification) जारी करें।
- भविष्य में किसी भी सार्वजनिक या सोशल मीडिया मंच पर ऐसी टिप्पणियां करने से बचें, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों।
कानूनी और सामाजिक गलियारों में छिड़ी बहस (न्यूज़ एनालिसिस)
इस कानूनी नोटिस के बाद सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में बहस तेज़ हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे ‘संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality) और अभिव्यक्ति की आज़ादी के रूप में देख रहा है। समर्थकों का कहना है कि पूर्व सीजेआई ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और प्रगतिशील विचारों की वकालत की है, और उनका यह बयान भी इसी सुधारवादी सोच का हिस्सा है।
वहीं, दूसरी तरफ पारंपरिक और धार्मिक विचारकों का मानना है कि पूजा-पाठ के नियम आस्था और पवित्रता से जुड़े हैं, जिन्हें ‘समानता या भेदभाव’ के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
आगे क्या?
देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर रहे व्यक्ति को धार्मिक आधार पर कानूनी नोटिस मिलना एक बड़ी घटना है। अब पूरे देश की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ इस नोटिस का कोई कानूनी जवाब देते हैं, या फिर यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंचेगा।
