देश की लोकतांत्रिक संरचना में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी; लोकसभा में पेश हुए तीन अहम विधेयक
नई दिल्ली | संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन आज केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। ये विधेयक भारत में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसदीय सीटों के भविष्य को पूरी तरह बदलने का सामर्थ्य रखते हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के पटल पर ये प्रस्ताव रखे।

इन तीन विधेयकों के प्रमुख बिंदु:
1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: इस विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) को बिना किसी देरी के लागू करना है।
- बदलाव: अब महिला आरक्षण को जनगणना 2026 के पूरा होने तक रोकने के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन (Delimitation) कर लागू करने का प्रस्ताव है।
- लक्ष्य: सरकार का इरादा है कि 2029 के आम चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ मिल सके।
2. परिसीमन (Delimitation) विधेयक, 2026: यह विधेयक लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या के पुनर्गठन से जुड़ा है।
- सीटों में भारी वृद्धि: इस प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 815 (राज्यों के लिए) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों के लिए) यानी कुल 850 करने की योजना है।
- तर्क: बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए छोटे निर्वाचन क्षेत्र बनाना ताकि जनप्रतिनिधि जनता के साथ बेहतर संवाद कर सकें।
3. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों में भी सीटों के नए आवंटन और महिला आरक्षण को कानूनी रूप से लागू करने के लिए पेश किया गया है।
सदन में तीखी बहस और वोटिंग
विधेयकों को पेश किए जाते समय सदन में भारी हंगामा भी देखने को मिला। विपक्ष ने खासकर परिसीमन के आधार और राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को लेकर सवाल उठाए। विपक्षी दलों द्वारा इन विधेयकों को पेश किए जाने के खिलाफ डिवीजन (मतदान) की मांग की गई।
- पक्ष में: 251 वोट
- विपक्ष में: 185 वोट बहुमत के आधार पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन विधेयकों को सदन में पेश करने की अनुमति दी।
प्रधानमंत्री का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में चर्चा के दौरान कहा कि ये विधेयक महिलाओं को “राजनैतिक न्याय” दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। उन्होंने विपक्ष से इसे राजनीतिक रंग न देने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।
अगला कदम: इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा और पारित करने के लिए कल, यानी 17 अप्रैल 2026 को मतदान होने की संभावना है।
