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मानवता की मिसाल: समय पर रक्तदान से बची 7 वर्षीय मासूम की जान, समाजसेवियों की पहल ने पेश की अनूठी मिसाल

रामानुजगंज (छत्तीसगढ़): क्षेत्र में मानवता और आपसी सहयोग की एक ऐसी प्रेरक घटना सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। एक व्हाट्सएप ग्रुप पर मिली सूचना और उस पर त्वरित कार्रवाई के कारण एक मासूम बच्ची को नया जीवन मिला है।

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई थी कीर्ति

​जानकारी के अनुसार, ग्राम बोड़ी निवासी अरुण यादव की 7 वर्षीय पुत्री कीर्ति यादव बीते दिनों एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। बच्ची का उपचार डाल्टनगंज में डॉक्टर अरुण शुक्ला की देखरेख में चल रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के पैर का ऑपरेशन बेहद अनिवार्य है, लेकिन शरीर में खून की अत्यधिक कमी के कारण ऑपरेशन संभव नहीं हो पा रहा था।

व्हाट्सएप मैसेज बना मददगार

​बच्ची की जान बचाने के लिए तत्काल O- (बी पॉजिटिव) ब्लड की आवश्यकता थी। जैसे ही यह जानकारी समाजसेवी आनंद गुप्ता को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मिली, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत डोनर की तलाश शुरू की। उन्होंने ग्राम नगरा निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप ठाकुर से संपर्क किया और स्थिति की गंभीरता बताई।

रात 12 बजे अस्पताल पहुंचकर किया रक्तदान

​अनुरोध मिलते ही प्रदीप ठाकुर बिना एक पल गवाए रक्तदान के लिए तैयार हो गए। सेवा का जज्बा ऐसा था कि वे रात लगभग 12 बजे डाल्टनगंज अस्पताल पहुंचे और रक्तदान किया। प्रदीप ठाकुर के इस साहसिक और मानवीय निर्णय के कारण समय पर रक्त उपलब्ध हो सका, जिससे डॉक्टरों ने बच्ची का सफल उपचार किया और उसकी जान बचाई जा सकी।

परिजनों ने जताया आभार

​मासूम की जान बचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने संकट की घड़ी में देवदूत बनकर आए समाजसेवी आनंद गुप्ता और रक्तदाता प्रदीप ठाकुर के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।

अपील: इस घटना के बाद समाजसेवियों ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे रक्तदान के प्रति जागरूक रहें और आवश्यकता पड़ने पर निस्वार्थ भाव से आगे आएं, क्योंकि आपका किया गया एक यूनिट रक्तदान किसी के परिवार का चिराग बुझने से बचा सकता है।

मुख्य बिंदु (Highlights for Social Media):

  • स्थान: रामानुजगंज/डाल्टनगंज
  • पीड़ित: 7 वर्षीय कीर्ति यादव (सड़क दुर्घटना में घायल)
  • रक्तदाता: प्रदीप ठाकुर (ग्राम नगरा)
  • प्रेरक: आनंद गुप्ता (समाजसेवी)
  • संदेश: समय पर रक्तदान, जीवनदान के समान।

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