हरा सोना बना ग्रामीणों की उम्मीद, रामानुजगंज में शुरू हुई तेंदूपत्ता खरीदी
पहाड़ों और जंगलों से पत्ता तोड़कर ला रहे ग्रामीण, तेंदूपत्ता सीजन से हजारों परिवारों को मिल रहा सहारा
रामानुजगंज (बलरामपुर)। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज वनपरिक्षेत्र में रविवार से ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की खरीदी का आगाज हो चुका है। वन परिक्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बनाए गए फड़ों में सुबह से ही संग्राहकों की चहल-पहल देखी जा रही है। पहले ही दिन ग्राम पंचायत पुरानडीह के फड़ में करीब 40 संग्राहकों ने सीजन का पहला तेंदूपत्ता जमा किया। इस सीजन के शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे हजारों परिवारों को आजीविका का एक बड़ा संबल मिला है।

🔴 कठिन संघर्ष: अंधेरे में सफर, पहाड़ों पर घंटों की मेहनत
तेंदूपत्ता का संग्रहण ग्रामीणों के लिए बेहद संघर्षपूर्ण होता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पत्ता तोड़ने के लिए परिवार के सदस्य सुबह अंधेरे में ही जंगलों और पहाड़ों की ओर निकल पड़ते हैं। कई किलोमीटर दूर पथरीले रास्तों और घने जंगलों में घंटों मशक्कत करने के बाद पत्तियां चुनी जाती हैं। इसके बाद इनकी गड्डियां (बंडल) बनाकर फड़ तक लाया जाता है। कई बार पूरे दिन की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद भी केवल 100 से 200 बंडल ही तैयार हो पाते हैं।
💰 तेंदूपत्ता की शासकीय दरें (एक नजर में)
खेती-किसानी के साथ-साथ तेंदूपत्ता सीजन ग्रामीणों की बड़ी आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है। शासन द्वारा निर्धारित दरें इस प्रकार हैं:
- प्रति सैकड़ा (100 बंडल): ₹550
- प्रति मानक बोरा: ₹5500 लगभग
पुरानडीह फड़ के मुंशी उमेश कुमार ने बताया: “रविवार से खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू कर दी गई है। ग्रामीण संग्राहक लगातार फड़ में पत्ता जमा कर रहे हैं। विभाग से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पूरी पारदर्शिता के साथ खरीदी की जा रही है।”
🏞️ दूरस्थ जंगलों की खाक छान रहे संग्राहक
ग्राम केरवाशीला निवासी प्रदीप हलदार, जो पिछले 10 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं, उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्थानीय जंगलों में अब पर्याप्त पत्ते नहीं मिलते। इसके कारण उन्हें अपने परिवार के साथ बछराज कुंवर जैसे सुदूर और पथरीले वन क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है। वहां से पत्तियां लाकर वे पुरानडीह फड़ में जमा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सीजन ग्रामीण जीवन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
🚫 अंतर्राज्यीय तस्करी पर वन विभाग की ‘कड़ी नजर’
चूंकि रामानुजगंज वनपरिक्षेत्र की सीमाएं पड़ोसी राज्य झारखंड से लगी हुई हैं, इसलिए विभाग इस बार बेहद सतर्क है। बाहरी राज्यों से लाकर यहां पत्ता खपाने (अवैध बिक्री) की आशंका को देखते हुए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
- विशेष बैरियर: वन परिक्षेत्र के 4 सर्किलों के 12 संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नाके/बैरियर लगाए गए हैं।
- निगरानी: सीमाओं पर वन विभाग की टीमें लगातार गश्त और निगरानी कर रही हैं।
डॉ. दिलरुबा बानो (रेंजर, रामानुजगंज): “तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। शासन के नियमों के तहत खरीदी की शुरुआत हो चुकी है। झारखंड सीमा से लगे होने के कारण बाहरी पत्तों की अवैध आवक रोकने के लिए 12 संवेदनशील जगहों पर बैरियर लगाकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।”
🔍 क्यों खास है ‘हरा सोना’?
छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तेंदूपत्ता को “हरा सोना” के नाम से जाना जाता है। जंगलों से लाए गए इन पत्तों की गड्डियों को फड़ों में बकायदा सुखाया जाता है, जिसके बाद इनका उपयोग मुख्य रूप से बीड़ी निर्माण के लिए किया जाता है। हर साल यह सीजन ग्रामीण अंचलों में रोजगार और नकदी आय का सबसे बड़ा और विश्वसनीय माध्यम बनता है।
